साल 2035 तक दुनियाभर से खत्म हो जाएगा सोना || Gold will end from around the world by the year 2035 || Sumit Saini IQ
जय हिन्द दोस्तो
त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में सोने की चर्चा एक बार फिर जोरों पर है। कोरोना वायरस के वजह से आई मंदी के बाद भी लोग गोल्ड बॉन्ड के तौर पर इस कीमती धातु की खरीदी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।पिछले कुछ महीनों से सोने को लेकर चर्चा जोरों पर है। इस कीमती धातु की बढ़ती कीमतों को लेकर कई ग्लोबल कंपनी गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) का मानना है कि साल 2035 तक दुनियाभर की सभी खदानों से सोना निकाल लिया जाएगा। इसके बाद जमीन के अंदर का सारा सोना खत्म हो जाएगा।क्या आपने कभी सोचा है कि अगर धरती पर सोना पूरी तरह से खत्म हो जाएगा तो फिर क्या होगा?
विशेषज्ञ पिछले काफी समय से सोना के खत्म होने की बात कर रहे हैं। इसे पीक गोल्ड कहते हैं, यानी वो अवस्था जब हम खदानों से लगभग पूरा का पूरा सोना निकाल चुके होंगे। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक आज हम उस स्टेज पर पहुंच गए हैं और सोना घटते जा रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 में पूरी दुनिया से लगभग 3,531 टन सोना निकला था।
बीबीसी की एक रिपोर्ट में बात करते हुए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के प्रवक्ता ने बताया हैं कि आने वाले सालों में सोना का खनन और भी कम हो सकता है। इसके साथ ही नया खदानों की खोज में कमी होगी, क्योंकि सोना कहीं न कहीं घट रहा है।
दुनियाभर में कितना सोना बाकी है, इस बात का अनुमान खनन कंपनियां कई तरह से लगाती हैं। WGC के मुताबिक, फिलहाल जमीन के नीचे लगभग 54,000 टन सोना है, जिसका खनन होना बाकी है। लेकिन जमीन के नीचे दबा यह सोना अब तक निकाले जा चुके सोने का केवल 30 फीसदी ही है। बाकी सोना हमारे घरों या बैंकों तक जा चुका है।
जो सोना किसी की निजी संपत्ति है, उसका आकलन करना काफी मुश्किल है. लोग सही आंकड़े देने से घबराते हैं. जमीन से निकाला जा चुका 50 प्रतिशत से ज्यादा सोना गहनों में बदल चुका है इसलिए भी खनन किए जा चुके सोने का असल आंकड़ा नहीं निकाला जा सका. इसके अलावा विकासशील देशों में छोटी खनन कंपनियां भी सोने का सही आंकड़ा देने से कतराती हैं.
Global कंपनी गोल्डमैन सैश के मुताबिक साल 2035 में दुनिया का पूरा सोना खत्म हो जाएगा। सोना की सभी खदानें खाली हो चुकी होंगी। नए खदानों की खोज नहीं होने के कारण अभी से यह हाल दिखने लगा है।
साल 2018 में ही खनन कंपनियों में सोने के घटने की शिकायत शुरू कर दी थी.गोल्डकॉर्प के बारे में बता दें कि ये सोने के खनन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में गिना जाता है. इस कंपनी ने हाल के सालों में जमीन के नीचे सोने के भंडार में 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखी. वहीं दूसरी ग्लोबल कंपनियों में सोने में गिरावट इससे कहीं ज्यादा है.
सोने की खदानों की खोज में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का है. ये देश दूसरे देशों में भी खनन पर पैसे लगा रहे हैं. अब माना जा रहा है कि लैटिन अमेरिका और अफ्रीकन देशों में सोने के नए भंडारों की खोज की जाएगी. साथ ही साथ सोने की खोज के लिए अब दूसरे ग्रहों को खोजने की बात भी हो रही है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक अब चांद पर भी सोने की संभावना देख रहे हैं. हालांकि वहां सोना मिल भी जाए, तो स्पेस से इसे खोदकर धरती पर लाने से सोने की मूल कीमत काफी ज्यादा होगी. इसलिए फिलहाल इसपर उतना काम नहीं किया जा रहा.
ऐसी ही खोज के दौरान स्पेस में 16-साइकी (16 Psyche) नाम का छोटा तारा दिखा. इस तारे की संरचना सोने, बहुमूल्य धातु प्लेटिनम, आयरन और निकल से बनी हुई है. अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक एस्टेरॉयड पर मौजूद लोहे की कुल कीमत करीब 8000 क्वॉड्रिलियन पाउंड है. यानी आसान तरीके से समझा जाए तो 8000 के बाद 15 शून्य और लगाने होंगे.
नासा 2022 के मध्य में Asteroid की जांच करने के लिए एक मिशन शुरू कर रहा है, जिसे डिस्कवरी मिशन (Discovery Mission) नाम दिया गया है. ये साल 2026 में साइकी तक पहुंचेगा और जांच शुरू करेगा.
तेल जैसे प्राकृतिक ईंधन की तुलना में सोने के साथ खास बात ये है कि इसे रीसाइकिल किया जा सकता है। ऐसे में अगर धरती के नीचे सोने के भंडार खत्म हो भी जाएं, तो भी घरों में रखा सोना नए तरीके से इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
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