जय हिंद दोस्तो
बारिश की प्रक्रिया देखने में सरल लगती है व बारिश होना तो आम बात होती है और आप सभी लोग जानते होगे कि बादल कैसे बनते हैं और कब उससे बारिश होती है। और ऐसे सवालों का जवाब आमतौर पर सभी को मालूम तो होता है, लेकिन अगर इस पूरी प्रक्रिया को बताने को कहा जाए तो बहुत ही कम लोग इसे बता पाएंगे। तो आज में आपको इस वीडियो में बारिश के पीछे की पुरी प्रक्रिया बताऊंगा।
तो पहले समझें पानी को।
पृथ्वी पर पानी के तीन रूप हैं. भाप, तरल और ठोस। जब पानी गर्म होता है तो वह भाप बनकर या गैस बनकर हवा में ऊपर उठता है. जब ऐसी भाप बहुत अधिक मात्रा में ऊपर जमा होती जाती है तो वह बादलों का रूप ले लेती है. इस पूरी प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं. और जब बादल ठंडे होते हैं तो गैसीय भाप तरल पानी में बदलने लगती है और ज्यादा ठंडक होने पर बर्फ में भी बदलने लगती है. वाष्प के सघन होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं. लेकिन बारिश होने के लिए केवल यही काफी नहीं है. पहले तरल बूंदें जमा होती हैं और बड़ी बूंदों में बदलती हैं. जब ये बूंदें भारी हो जाती हैं तब कहीं जा कर बारिश होती है.
पानी के आसमान से नीचे आने की प्रक्रिया को वर्षण कहते हैं.
वर्षण के कई रूप होते हैं. यह बारिश , ओले गिरना, हिमपात आदि के रूप में हो सकता है। जब पानी तरल रूप में न गिर कर ठोस रूप में गिरता है तो उसे हिमपात कहेंगे. वहीं बारिश के साथ बर्फ के टुकड़े गिरना ओलों का गिरना कहलाता है. इसके अलावा कई जगह सर्दियों में पानी की छोटी छोटी बूंदें भी गिरती हैं जिन्हें हम ओस कहते हैं.
अभी बात अगर सिर्फ बारिश की करें तो बारिश हर जगह नहीं होती और हर जगह एक सी नहीं होती है. पृथ्वी पर बहुत सारी प्रक्रियाएं हैं जिनके कारण किसी स्थान पर बारिश होती है. इनमें भारत में सबसे जानी मानी प्रक्रिया है मानसून की प्रक्रिया जिसकी वजह से एक ही इलाके में एक से तीन चार महीने तक लगातार या रुक रक कर बारिश होती है. वहीं कई बार बेमौसम बारिश होती है जिसे स्थानीय वर्षा कहा जाता है. कई बार समुद्र से चक्रवाती तूफान बारिश लाकर तबाही तक ला देते हैं.
बारिश की वजह एक नहीं होती है. समुद्र स्थल से दूरी, इलाके में पेड़-पौधों की मात्रा, पहाड़ों से दूरी, हवा के बहने का पैटर्न और जलवायु के अन्य तत्व मिलकर यह तय करते हैं
कि किसी जगह पर बारिश कैसी, कब-कब और कितनी होगी. कई जगह रोज नियमित रूप से दोपहर तीन बजे के आसपास बारिश होती है तो कई जगह सालों तक एक दो बार ही बारिश हो पाती है.
वैसे बारिश की वजहों को स्थानीय, वैश्विक और मौसमी कारणों बांटा जाए तो इसके पैटर्न को समझने में आसानी हो जाती है. जैसे भारत में गर्मी के मौसम के दूसरे भाग में बारिश होती है जिसे मानसून या बरसात का मौसम कहते हैं. इसका कारण भारत की भौगोलिक स्थिति यानी कि वैश्विक है और इस वजह से हमारे देश में बारिश का खास मौसम है. वहीं कई जगह ठंड के मौसम में बारिश होती है. समुद्र के किनारे वाले इलाकों में बारिश कभी भी हो सकती है, लेकिन वहां भी आसपास के भूगोल और जलावायु का प्रभाव जरूर होता है.
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