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दुनिया का सबसे अनोखा गांव जहां केवल महिलाएं रहती हैं, पुरुषों की है No Entry

उमोजा गांव में केवल महिलाएं रहती हैं. इस महिला प्रधान गांव में पुरुषों का आना मना है. इतना ही नहीं, महिलाओं के इस गांव में कोई पुरुष चोरी-छिपे भी नहीं आ सकता है. बता दें कि यहां की महिलाओं ने इस पूरे गांव की कंटीले तारों से घेराबंदी कर रखी हैविश्व भर में ऐसी हजारों सामाजिक समस्याएं हैं, जो किसी भी समाज या देश के विकास में अड़चनें उत्पन्न करती हैं. आज के इस आधुनिक समय में भी ऐसे कई देश हैं, जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और सम्मानजनक समाज के सपने देख रही हैं. लेकिन दुनिया में एक ऐसा भी गांव हैं, जहां की महिलाओं निश्चित तौर पर अन्य महिलाओं से काफी सुरक्षित हैं और एक सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही हैं. अफ्रीकी देश केन्या के समबुरू में एक गांव है, जिसका नाम है उमोजा. उमोजा एक ऐसा गांव हैं, जहां महिलाएं अपनी इच्छा से जिंदगी जीती हैं. इस गांव की कुछ खास बाते हैं, जिसके बारे में जानने के बाद आप हैरान रह जाएंगे. जी हां, केन्या के उमोजा गांव में केवल महिलाएं रहती हैं. इस महिला प्रधान गांव में पुरुषों का आना मना है. इतना ही नहीं, महिलाओं के इस गांव में कोई पुरुष चोरी-छिपे भी नहीं आ सकता है. बता दे...
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इंसान पक्षी की तरह क्यो नही उड़ सकता है || Know why humans cannot fly like birds || Why bird

 पक्षियों (Birds) की उड़ने (Fly) के लिए इंसान (Humans) के पास पंख (Wings) होने ही काफी नहीं होगा. उसके न उड़ पाने की और भी वजहें होती है. सभी की बचपन में कम से कम एक बार उड़ने (Flying) की इच्छा जरूर पैदा हुई होगी. लेकिन जब हमने बड़ों से यह सवाल पूछा था कि हम उड़ क्यों नहीं सकते तो क्या जवाब मिला था. अगर आज हमसे कोई पूछे कि इंसान (Humans) उड़ क्यों नहीं सकता तो इस सवाल का क्या जवाब होगा. यह बात बहुत से लोगों बड़ी उम्र तक हैरान करती है कि छोटे पक्षी (Birds) तक जिस काम को आसानी से कर जाते हैं हम इंसान क्यों नहीं कर पाते हैं. आज हम इसी सवाल का जवाब का ढूढेंगे.  इस सवाल का जवाब हमें ज्यादातर यही मिलता है कि हमारे पर पंख नहीं होते इसलिए हम इंसान उड़ नहीं सकते. हम जब पंछियों की तरह पंख भी लगा लें तो धरती हमें खींच लेती है, लेकिन जब पक्षी अपने पंख फड़फडाते हैं तो वे हवा में उड़ने लगते हैं. तो पहले हम पंख की ही पहेली को सुलझाते हैं. पंखों में क्या होता है खास पक्षियों के पंखों में खास बात होती है और वह यह कि उनके पंख इस तरह से बने जिससे वे हवा को सही तरीके से काटते हैं इससे उनके उड़ने ...

आखिर टूथपेस्ट के ट्यूब पर क्यों बनी होती हैं अलग-अलग रंग की पट्टियां? जानिए इसका मतलब

  टूथपेस्ट का इस्तेमाल तो हम रोजाना करते हैं, लेकिन इससे जुड़ी कई ऐसी जानकारियां हैं, जिनके बारे में हमें पता नहीं है। अगर आप टूथपेस्ट के ट्यूब पर ध्यान दिए होंगे, तो उसपर अलग-अलग रंग की पट्टियां बनी होंगी। लाल, हरा, काला और नीले रंग से बनी इन पट्टियों का मतलब शायद ही आप जानते होंगे। तो चलिए इसके बारे में बता देते हैं।

✅क्या आप जानते हैं कि बारिश कैसे होती है ? || do you know how it rains? || Science behind rain🔥

 जय हिंद दोस्तो  बारिश की प्रक्रिया देखने में सरल लगती है व बारिश होना तो आम बात होती है और आप सभी लोग जानते होगे कि बादल कैसे बनते हैं और कब उससे बारिश होती है। और ऐसे सवालों का जवाब आमतौर पर सभी को मालूम तो होता है, लेकिन अगर इस पूरी प्रक्रिया को बताने को कहा जाए तो बहुत ही कम लोग इसे बता पाएंगे। तो आज में आपको इस वीडियो में बारिश के पीछे की पुरी प्रक्रिया बताऊंगा।  तो पहले समझें पानी को। पृथ्वी पर पानी के तीन रूप हैं. भाप, तरल और ठोस। जब पानी गर्म होता है तो वह भाप बनकर या गैस बनकर हवा में ऊपर उठता है. जब ऐसी भाप बहुत अधिक मात्रा में ऊपर जमा होती जाती है तो वह बादलों का रूप ले लेती है. इस पूरी प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं. और जब बादल ठंडे होते हैं तो गैसीय भाप तरल पानी में बदलने लगती है और ज्यादा ठंडक होने पर बर्फ में भी बदलने लगती है. वाष्प के सघन होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं. लेकिन बारिश होने के लिए केवल यही काफी नहीं है. पहले तरल बूंदें जमा होती हैं और बड़ी बूंदों में बदलती हैं. जब ये बूंदें भारी हो जाती हैं तब कहीं जा कर बारिश होती है.  पानी के आ...

दुनिया के पांच सबसे जहरीले जीव, जो पलभर में ही सुला सकते हैं इंसान को मौत की नींद

  दुनिया में एक से एक खूबसूरत जीव हैं, जो अपनी खूबसूरती से लोगों को लुभाते हैं। इन जीवों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे वो किसी दूसरे ग्रह से आए हों। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे जीवों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बेहद ही खतरनाक और जहरीले हैं। इनका जहर इतना खतरनाक है, जो पल भर में इंसान को मौत की नींद सुला सकता है। 2  of 6 फनल वेब स्पाइडर  - फोटो : सोशल मीडिया फनल वेब स्पाइडर (मकड़ी) मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है, इसलिए इसे ऑस्ट्रेलियन फनल वेब स्पाइडर भी कहा जाता है। इसका जहर सायनाइड से भी ज्यादा खतरनाक होता है। कहते हैं कि यह मकड़ी अगर किसी को काट ले तो 15 मिनट से लेकर 3 दिन के अंदर उसकी मौत हो जाती है। जेलीफिश वैसे भी खतरनाक होती है, ये तो आप जानते ही होंगे, लेकिन बॉक्स जेलीफिश बहुत ही ज्यादा जहरीली होती है। अब तक दुनिया में जितने भी जहरीले जीव-जंतुओं की खोज हुई है, यह उनमें से सबसे ज्यादा जहरीली है। कहते हैं कि इसका जहर एक बार में करीब 60 लोगों को मार सकता है। अगर बॉक्स जेलीफिश का जहर एक बार इंसान के शरीर में पहुंच जाए तो एक मिनट के अंदर उसकी मौत निश्चित है। बिच्...

काला पानी की सजा में क्या होता था || What happened in the punishment of Kalapani || काला पानी की जेल

  काला पानी की सजा' बीते जमाने की एक ऐसी सजा थी, जिसके नाम से कैदी कांपने लगते थे। दरअसल, यह एक जेल थी, जिसे सेल्यूलर जेल के नाम से जाना जाता था। आज भी लोग इसे इसी नाम से जानते हैं। यह जेल अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है। इसे अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए बनाया गया था, जो कि भारत की भूमि से हजारों किलोमीटर दूर स्थित थी। काला पानी का भाव सांस्कृतिक शब्द काल से बना माना जाता है जिसका अर्थ होता है समय या मृत्यु। यानी काला पानी शब्द का अर्थ मृत्यु के स्थान से है, जहां से कोई वापस नहीं आता। हालांकि अंग्रजों ने इसे सेल्यूलर नाम दिया था, जिसके पीछे एक हैरान करने वाली वजह है। सेल्यूलर जेल अंग्रेजों द्वारा भारत के स्वतंत्रता सेनानियों पर किए गए अत्याचारों की मूक गवाह है। इस जेल की नींव 1897 ईस्वी में रखी गई थी और 1906 में यह बनकर तैयार हो गई थी। इस जेल में कुल 698 कोठरियां बनी थीं और प्रत्येक कोठरी 15×8 फीट की थी। इन कोठरियों में तीन मीटर की ऊंचाई पर रोशनदान बनाए गए थे ताकि कोई भी कैदी दूसरे कैदी से बात न कर सके। यह ज...

जीभ से भी पता चलता है आपके स्वास्थ्य का राज

  अमूमन फिजिकल चेकअप के दौरान डाॅक्टर मरीजों से कहते हैं कि मुंह खोलिए, जबान बाहर निकालिए, ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि मरीज के गले की जांच की जा सके। डाक्टर अभिषेक बताते हैं कि टाॅर्च की मदद से भी फिरंक्स (phyrynx) की जांच की जाती है, जिसमें देखा जाता है कि मरीज को कहीं टाॅन्सिल या फिर आयडोनाइड की समस्या तो नहीं है। या फिर मरीज को कंजेक्टिवाइटिस की समस्या तो नहीं है। कंजेक्टिवाइटिस की बीमारी बच्चों से लेकर बड़ों को होती है। इसके कारण गले में लालीपन व सूजन आ जाता है। डाॅक्टर टार्च की मदद से उसी की जांच करते हैं। जीभ से भी पता चलता है आपके स्वास्थ्य का राज चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाॅक्टर अभिषेक बताते हैं कि फिजिकल चेकअप के दौरान मरीज को जीभ निकालने को भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि हम जीभ में लार के लेवल को देखते हैं। यदि जीभ में लार नहीं होगा इसका मतलब यह कि मरीज डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहा है। वहीं यदि जीभ में पर्याप्त मात्रा में लार है तो इसका अर्थ यह हुआ कि मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं है। गले को छूकर की जाती है जांच फिजिकल चेकअप की जांच की बात बताते हुए डाक्टर अभिष...